रद्दी
मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014
कोशिश
सुनो !
बस दो कदम
और चलो मेरे साथ
मुद्दत से जर्द पड़े
मकान की इन दीवारों पर
फिर कुछ तलाश लें ...
सुनो तो !
ऐसा न करें
कि -
झाड़-बुहार कर
रंग दें इन्हें
और आशियाँ बना लें .....
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